चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||
हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 ||
जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 ||
जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 ||
5:26 AM
|
|
This entry was posted on 5:26 AM
You can follow any responses to this entry through
the RSS 2.0 feed.
You can leave a response,
or trackback from your own site.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
2 comments:
बहुत अच्छा लगा धन्यवाद|
चोखी बात है जी..... पण मायड़ भाषा में लिखो तो बांच्यां ठाठ आवै..... हिंदी में तो घणा ही लोग मांडै.... मायड़ में जिको रस है... बो और कठे ई कोनी...
Post a Comment